Saturday, 28 April 2012

जादू लोग


कुछ लोग जादू से बने होते हैं
जैसे बचपन की नुक्कड़ का वो हलवाई
भद्दी काली डरावनी सी शकल
ज्यों रिसालों से निकला हो अय्यार कोई
पर उसके हाथों की बनी जो भी मिठाई खाई
ज़मानेभर की शक्कर उन्हीं हाथों में मिली....

कुछ लोग जादू से बने होते हैं
जैसे दिल्ली की वो काफ़िर लड़की
जो मेरी दोस्त है हमराज़ भी है
जो मुझे मेरी तरह जानती है
जो बिना बात किए बोलती है
इन दिनों भी वो जी खोल के हंस लेती है....

कुछ लोग जादू से बने होते हैं
जैसे बाबा मेरे
किसी सोख्ता कागज़ की तरह
मैं जब भी ग़मों की स्याही बिखेर लेती हूं
वो चुपचाप उसे खुद में सोख लेते हैं
बाद इसके भी इतने उजले हैं
जैसे सूरज हो मेरी दुनिया का
रोशनी भी, धूप भी, ताक़त भी मेरी....

कुछ लोग जादू से बने होते हैं
तुम भी हो ना
जब भी तुम्हारे क़रीब आई हूं
इक नया दर्द लेके लौटी हूं
दर्द तुम्हारे भीतर कुछ ऐसे ठहरे हैं
जो बस मेरी राह तकते हैं
तुमपे बेअसर है, बेसबब हैं जो
वो दर्द मुझपे यूं गुज़रते हैं
जैसे जादू ही हो गया हो कोई
और फिर मैं कहां रह जाती हूं
मैं भी जादू में बदल जाती हूं

कुछ लोग जादू से बने होते हैं..........

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